होली के पर्व पर अनेक मंदिर और आश्रम फूलों-होली, राधा-कृष्ण भजन और सांगीतिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं ताकि रंगों के साथ-साथ आध्यात्मिक आनंद भी साझा किया जा सके। आयोजकों का उद्देश्य पारंपरिक गुलाल तथा पुष्प-वर्षा के माध्यम से एक स्वच्छ व सामुदायिक उत्सव का अनुभव देना है। कई स्थानों पर बच्चों और युवाओं के लिये गीत-नृत्य प्रतियोगिताएँ और पारिवारिक भजन-वंदना का आयोजन प्रस्तावित है। सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा, साफ-सफाई और बीमारियों से बचाव के उपाय सुनिश्चित किए जा रहे हैं। मंदिर समितियाँ स्थानीय प्रतिष्ठानों के साथ मिलकर — विशेष रूप से वृद्धों और जरुरतमंदों के लिए — सामुदायिक भोजन का भी आयोजन कर रही हैं। इससे पर्व का सामाजिक आयाम और भी सशक्त होता है तथा समुदाय में भाईचारे की भावना बढ़ती है।
होली: मंदिरों में फूलों-होली, भजन और सामुदायिक मेलजोल
