आरती हिंदू पूजा-पद्धति का सबसे पवित्र और आनंदमय चरण है। यह केवल एक रीति नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। आरती में दीपक को घुमाने का अर्थ है—अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा, अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना।
धार्मिक मान्यता है कि आरती के दौरान देवता की ऊर्जा दीपक की लौ में केंद्रित होती है। उसी ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए भक्त अपने हाथों को दीपक की ओर ले जाकर आंखों पर लगाते हैं। यह उनके जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का प्रतीक होता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से घी-दीपक की लौ वातावरण में शुद्धता बढ़ाती है। घी जलने से जो सुगंध और कंपन उत्पन्न होता है, उससे मानसिक तनाव कम होता है और मन एकाग्र होता है। दीपक की रोशनी मन में शांति और सुरक्षा की भावना उत्पन्न करती है।
आरती केवल पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव है जो व्यक्ति को देवत्व की अनुभूति कराता है और मन को शुद्ध करता है।
