माला जप का महत्व—क्यों 108 मनकों का होता है जपमाला?

जपमाला हिंदू साधना की प्रमुख परंपरा है। माला जप मन को एकाग्र करने और मंत्र के प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जाता है। जपमाला में 108 मनके क्यों होते हैं, यह प्रश्न कई बार उठता है। इसका उत्तर धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों रूपों में मिलता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार 108 संख्या पूर्णता, पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। कहा जाता है कि शरीर में 108 प्रमुख नाड़ियाँ होती हैं जो हृदय से जुड़ी होती हैं। इसलिए 108 बार मंत्र जप शरीर और चेतना पर गहरा प्रभाव डालता है।

खगोल विज्ञान में भी 108 का विशेष महत्व है। सूर्य और पृथ्वी की दूरी सूर्य के व्यास की लगभग 108 गुना है। इसी प्रकार पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी भी चंद्रमा के व्यास की लगभग 108 गुना है। यह संयोग संख्या को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ता है।

माला जप मन को स्थिर करता है, सांस की गति नियंत्रित करता है और ध्यान को गहरा बनाता है। नियमित जप तनाव कम करता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। इसी कारण माला जप आज भी योग, ध्यान और पूजा का अभिन्न हिस्सा है।