रक्षाबंधन के अवसर पर कई मंदिरों ने पारिवारिक आशीर्वाद एवं सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है। विशेष पूजा-समय और आशीर्वाद सत्र आयोजित कर भाइयों तथा बहनों के लिए संयुक्त पूजा की व्यवस्था रखी जाती है ताकि परिवार एक स्थान पर आकर श्रद्धापूर्वक रक्षासूत्र बाँध सकें। कुछ मंदिरों ने वृद्धाश्रमों और अनाथालयों में जाकर राखी-उत्सव के साथ दान एवं सहयोग की पहल भी की है। आयोजक बताते हैं कि इस पर्व के माध्यम से सामाजिक सहभागिता और सहानुभूति को बढ़ावा मिलता है। मंदिर सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के साथ-साथ प्रसाद वितरण और भीड़ नियंत्रण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। धार्मिक संस्थाओं का मानना है कि पारिवारिक संस्कारों को जीवन में बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजन उपयुक्त मंच प्रदान करते हैं और समाज में सौहार्द व नैतिकता का संदेश देते हैं।
रक्षाबंधन: मंदिरों में पारिवारिक आशीर्वाद व समाज-सेवा कार्यक्रम
