जन्माष्टमी: झाँकियों, भजन-संध्याओं और बाललीला मंचन की तैयारी

जन्माष्टमी झाँकियों, भजन-संध्याओं और बाललीला मंचन की तैयारी

जन्माष्टमी के पर्व के लिये विभिन्न मंदिर व सांस्कृतिक संस्थाएँ बाललीला, झाँकियाँ और भजन-संध्याओं का आयोजन कर रही हैं। मूर्तिकार एवं रंगकर्मी जन्मकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित दृश्यों का सर्जन कर रहे हैं ताकि दर्शकों को कथात्मक रूप से प्राकृतिक और पारम्परिक अनुभव मिल सके। आयोजक बताते हैं कि प्रतिस्पर्धात्मक मटकी-फोड़, रास-लीला मंचन और कथा-वाचन कार्यक्रमों के साथ-साथ मंदिरों में कृष्ण भक्ति पर आधारित शास्त्रीय गायन को भी प्रमुखता दी जाएगी। सुरक्षा और व्यवस्थापकीय कारणों से प्रवेश-निकास के मार्ग पूर्व से चिन्हित किए जा रहे हैं और दर्शक/भक्तों के लिये शेष सुविधाएँ—पेयजल, शौचालय व प्राथमिक चिकित्सा—व्यवस्थित की जा रही हैं। कई स्थानों पर कलाकारों व बच्चों के लिए कार्यशालाएँ भी आयोजित की जा रही हैं ताकि युवा पीढ़ी को लोककला व धार्मिक कथाओं से जोड़ा जा सके। आयोजनों के दौरान पर्यावरण-हितैषी अभ्यास जैसे-गैर-विषैले रंगों का उपयोग व प्लास्टिक-मुक्त आयोजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तरह के आयोजनों से न केवल भक्ति भाव बरकरार रहता है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहरों को भी आगे सहेजा जाता है।