वृंदावन उत्तर भारत का वह पवित्र स्थान है जहाँ हर कदम पर राधा-कृष्ण की प्रेम-लीलाओं की स्मृति बसती है। यहाँ के प्रमुख मंदिर—बांके बिहारी जी, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर और राधा रमण मंदिर—हर दिन हजारों भक्तों से भरे रहते हैं। बाँके बिहारी मंदिर की “दरबार-दर्शन” परंपरा अतुलनीय मानी जाती है, जहाँ प्रतिमा को पर्दे के माध्यम से ही दर्शन कराया जाता है।
वृंदावन का वातावरण भक्ति रस से भरा है। गलियों में “राधे-राधे” की ध्वनि निरंतर गूँजती रहती है। यहाँ की एक विशेष पहचान है—फूलों की होली, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।
यमुना तट पर स्थित केशव घाट और विश्राम घाट भी तीर्थयात्रियों को गहरा आध्यात्मिक स्पर्श प्रदान करते हैं। आश्रमों में प्रतिदिन कीर्तन, प्रवचन और भजन संध्याएँ आयोजित होती हैं, जो मन को अत्यंत शांत करती हैं।
वृंदावन की यात्रा केवल दर्शन भर नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और surrender की भावना का अनुभव कराती है। माना जाता है कि यहाँ राधा-कृष्ण की उपस्थिति आज भी अनुभूति के रूप में विद्यमान है।
यह तीर्थ स्थान मन को हल्का, हृदय को प्रेम से भरा और आत्मा को शांत करने वाला अद्वितीय स्थान है।
