द्वारका—भगवान श्रीकृष्ण की नगरी और समुद्र तट की दिव्य आध्यात्मिकता

द्वारका गुजरात का वह पवित्र तीर्थ स्थल है जो भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि माना जाता है। द्वारकाधीश मंदिर यहाँ का मुख्य केंद्र है, जिसकी प्राचीन वास्तुकला और समुद्री हवा मिलकर आध्यात्मिक वातावरण का अनोखा संगम प्रस्तुत करती हैं। मंदिर का शिखर दूर से ही दिखाई देता है और इसका ध्वज प्रतिदिन कई बार बदला जाता है, जिसे शुभ माना जाता है।

समुद्र के किनारे स्थित मंदिर श्रद्धालुओं में भक्ति और आस्था की भावना जगाता है। माना जाता है कि द्वारका वही नगर है जिसे श्रीकृष्ण ने यदुवंश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए बसाया था। यहाँ के घाटों पर बैठकर समुद्र की लहरों की आवाज व्यक्ति को गहन शांति प्रदान करती है।

द्वारका यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है—“बेत्त द्वारका”, जहाँ नाव से पहुँचा जाता है। यह स्थान भी कृष्ण से जुड़े कई दैवीय प्रसंगों का साक्षी माना जाता है। नाकोडा, रुक्मिणी मंदिर, गोमती घाट और गीता मंदिर भी यात्रियों को आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं।

द्वारका का वातावरण भक्तों को श्रीकृष्ण की लीला, करुणा और ज्ञान से जोड़ता है। यहाँ की यात्रा मनुष्य को भक्ति, संतुलन और जीवन के सच्चे अर्थ का अनुभव कराती है।