शबरी की कथा बताती है कि सच्ची भक्ति जाति, रूप और सामाजिक सीमाओं से परे होती है। शबरी एक वनवासी महिला थीं, जिनका जीवन तपस्या और रामभक्ति में व्यतीत हुआ। ऋषि मत्तंग के आश्रम में दीर्घकाल तक सेवा करते हुए शबरी को विश्वास था कि एक दिन भगवान राम अवश्य आएँगे।
राम और लक्ष्मण जब सीता की खोज में दंडकारण्य पहुँचे, तब उनका स्वागत शबरी ने अत्यंत प्रेम से किया। कथा के अनुसार शबरी ने बेर चख-चखकर दिए, ताकि राम को केवल मीठे बेर ही प्राप्त हों। राम ने इसे सच्ची भक्ति का सर्वोच्च रूप कहकर स्वीकार किया।
यह कथा दर्शाती है कि ईश्वर को बाहरी वैभव से नहीं बल्कि भाव और समर्पण से प्रसन्न किया जा सकता है। शबरी का प्रेम “दास्य-भक्ति” का आदर्श उदाहरण माना जाता है और संत रामानुज तथा भक्त कवियों ने इसे भक्ति के शुद्धतम रूप की उपमा दी है।
राम-शबरी मिलन की कथा: भक्ति की सरलता और प्रेमपूर्ण समर्पण का संदेश
