हिंदू पूजा-पद्धति में ‘संकल्प’ सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। संकल्प का अर्थ है — निश्चित उद्देश्य या भावना के साथ मन को एक दिशा में केंद्रित करना। पूजा के शुरू में जल लेकर संकल्प करने का उद्देश्य यह होता है कि व्यक्ति जो भी अनुष्ठान कर रहा है, वह समर्पित भाव से और सही कारण से करे।
आध्यात्मिक रूप से संकल्प मन की स्थिरता को दर्शाता है। जब मन लक्ष्य-निर्धारित होता है, तो उसमें निश्चय और दृढ़ता आती है। यह केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है। कहा जाता है कि बिना संकल्प के कोई भी कार्य अधूरा रह जाता है, क्योंकि मन दिशा-रहित बना रहता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संकल्प ध्यान का एक रूप है। इससे मस्तिष्क में clarity आती है, भावनाएँ नियंत्रित होती हैं और मन एकाग्र होता है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि संकल्प से मस्तिष्क में सकारात्मक संकेत पैदा होते हैं, जो लक्ष्यपूर्ति में मदद करते हैं।
इसीलिए भारतीय संस्कृति में हर शुभ कार्य—जैसे विवाह, गृह प्रवेश, जनेऊ, व्रत—संकल्प से ही शुरू होता है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से जागरूक और मानसिक रूप से स्थिर बनाता है।
