मार्कंडेय ऋषि कथा: शिव-भक्ति और काल को भी पराजित करने का साहस

मार्कंडेय ऋषि कथा शिव-भक्ति और काल को भी पराजित करने का साहस

मार्कंडेय ऋषि को अल्पायु का श्राप था, परंतु वे शिव के अनन्य भक्त थे। जब यमराज उनके प्राण लेने आए, तब मार्कंडेय ने शिवलिंग को आलिंगन कर “त्र्यम्बकं यजामहे” मंत्र का जाप किया।
भगवान शिव उनके भक्ति-बल से प्रसन्न हुए और यमराज को रोककर मार्कंडेय को अमरत्व का वरदान दिया। यही प्रसंग “महामृत्युंजय मंत्र” का आधार माना जाता है।
कथा का संदेश यह है कि भय, मृत्यु और संकटों पर भी आध्यात्मिक शक्ति, साहस और सतत भक्ति से विजय पाई जा सकती है।