हिंदू दर्शन के अनुसार यह सृष्टि पाँच मूलभूत तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बनी है। इन्हें पंचतत्व कहा जाता है। यह केवल धार्मिक अवधारणा नहीं बल्कि जीवन और प्रकृति की वैज्ञानिक समझ भी है। हर तत्व का अपना गुण, प्रभाव और महत्व है।
पृथ्वी स्थिरता, धैर्य और मजबूती का प्रतीक है। जल प्रवाह, लचीलापन और शुद्धता को दर्शाता है। अग्नि ऊर्जा, परिवर्तन और पवित्रता का स्रोत है। वायु जीवनशक्ति और गति का symbol है, जबकि आकाश अनंतता और व्यापकता का द्योतक है।
मनुष्य शरीर भी इन्हीं तत्वों से निर्मित माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि शरीर और प्रकृति में गहरा संबंध है। जब पंचतत्व संतुलित होते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ और शांत रहता है, लेकिन इनके असंतुलन से तनाव, बीमारी और मानसिक बेचैनी उत्पन्न हो सकती है।
योग, प्राणायाम, ध्यान और यज्ञ जैसी विधियाँ पंचतत्वों को संतुलित करने के लिए बनाई गई हैं। यही वजह है कि भारतीय परंपरा में प्रकृति संरक्षण को धार्मिक कर्तव्य माना गया है—क्योंकि प्रकृति का संतुलन ही जीवन का संतुलन है।
