आज के समय में मनुष्य अपने आसपास की भागदौड़, तनाव और निरंतर दबाव में जी रहा है। ऐसे वातावरण में मन को शांत रखना एक चुनौती बन गया है। ध्यान एक ऐसा साधन है, जो मन और आत्मा दोनों को संतुलित करता है। ध्यान का अर्थ है—मन को एक बिंदु पर स्थिर करना और सभी अनावश्यक विचारों से मुक्त होना। जब व्यक्ति नियमित रूप से ध्यान करता है, तो उसकी मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और विचार अधिक स्पष्ट होने लगते हैं।
ध्यान का सबसे बड़ा लाभ है—अंतरमन में शांति का उदय। जब मन शांत होता है, तब निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और व्यक्ति भावनात्मक रूप से अधिक मजबूत बन जाता है। यह तनाव, अनिद्रा और बेचैनी को कम करने में भी अत्यंत प्रभावी है। ध्यान से मस्तिष्क में सकारात्मक हार्मोन उत्पन्न होते हैं, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ बनाते हैं।
ध्यान केवल बैठकर आंखें बंद करने तक सीमित नहीं है। सजग श्वास, मंत्र जप, प्रकृति के बीच बैठना, या ध्यानपूर्ण चलना भी ध्यान का ही रूप हैं। मुख्य बात है—मन की एकाग्रता और वर्तमान पल के प्रति जागरूकता।
