गायत्री मंत्र का अर्थ, महत्व और आध्यात्मिक प्रभाव

गायत्री मंत्र हिंदू धर्म का सबसे शक्तिशाली और सार्वभौमिक मंत्र माना जाता है। इसका उच्चारण व्यक्ति के मन, बुद्धि और चेतना को शुद्ध करता है। मंत्र इस प्रकार है—
“ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं…।”
इस मंत्र में सूर्य की दिव्य ऊर्जा का आह्वान किया जाता है, जो जीवन, प्रकाश और ज्ञान का स्रोत मानी जाती है।

गायत्री मंत्र का अर्थ है — हे परम चेतना! हमें ऐसी बुद्धि दो कि हम सही मार्ग को पहचान सकें और उसी पर चल सकें। यह मंत्र मनुष्य के भीतर स्थित प्रकाश को जागृत करता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है। इसकी ध्वनि-तरंगें मस्तिष्क को शांत करती हैं और मन में सकारात्मकता भरती हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि रोज़ प्रातःकाल सूर्य देव का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र का जाप करने से व्यक्ति में आत्मविश्वास, एकाग्रता और ऊर्जा का संचार होता है। यह मंत्र केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी लाभकारी है। इसकी ध्वनि का कंपन शरीर की नसों को सक्रिय करता है और मानसिक तनाव को कम करता है।

इसी कारण गायत्री मंत्र को ‘वेदों की माता’ कहा गया है और इसे हर व्यक्ति के जीवन में शामिल करने की सलाह दी जाती है।