गणेश चतुर्थी के मौके पर सार्वजनिक पंडालों और मंडलों द्वारा इस वर्ष थीम-आधारित सज्जा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई आयोजक पारंपरिक कला, प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को अपनी थीम बनाकर शिल्प एवं प्रदर्शन प्रस्तुत कर रहे हैं। इस वर्ष पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों और पानी में घुलनशील सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विसर्जन के बाद जल-प्रदूषण कम से कम हो। आयोजक अपने-अपने स्तर पर भक्तों के लिये सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम, स्थानीय कलाकारों के मंच और नि:शुल्क प्रसाद व्यवस्था कर रहे हैं। सुरक्षा टीमों ने प्रवेश-निकास के विस्तृत मार्ग, भीड़-नियंत्रण और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की हैं। साथ ही समुदायिक जागरूकता अभियानों के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभाव तथा सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति श्रद्धालुओं को संवेदनशील किया जा रहा है। ऐसी व्यवस्थाएँ सिर्फ धार्मिक उत्सव को सफल नहीं बनातीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का भी संदेश देती हैं।
गणेश चतुर्थी: सार्वजनिक मंडलों का थीम-आधारित सज्जा और पर्यावरण-ध्यान
