गंगा के अवतरण की कथा धरती के उद्धार और तपस्या की शक्ति को दर्शाती है। राजा सगर के वंशज भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने हेतु कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने गंगा को पृथ्वी पर आने का वर दिया।
किन्तु गंगा का वेग इतना प्रबल था कि सीधा अवतरण धरती को नष्ट कर देता। इसलिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को रोका और फिर नियंत्रित होकर पृथ्वी पर प्रवाहित किया। यह प्रसंग “भागीरथ प्रयास” का प्रतीक बन गया—अर्थात वह प्रयास जो असंभव दिखता हो किंतु लगातार धैर्य और संकल्प से सफल हो जाए।
इस कथा का संदेश केवल नदी का अवतरण भर नहीं, बल्कि शुद्धता, करुणा और कल्याण की भावना भी दर्शाता है। गंगा आज भी भारतीय आस्था की जीवन-रेखा मानी जाती है।
गंगा अवतरण कथा: भागीरथ तपस्या, शिव का जटाओं में धारण करना और धरती का उद्धार
