एकादशी व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत फलदायक माना गया है। यह महीने में दो बार आता है और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष दिन माना जाता है। पुराणों के अनुसार, एकादशी व्रत का पालन करने से मन की शुद्धि, पापों का क्षय और आध्यात्मिक उन्नति होती है। कहा जाता है कि इस दिन उपवास करने से मन अधिक शांत और शरीर अधिक हल्का महसूस करता है, जिससे ध्यान और पूजा में एकाग्रता बढ़ती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो महीने में दो बार उपवास करना शरीर के पाचन तंत्र को विश्राम देता है। इससे शरीर में संचित विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज़्म संतुलित रहता है। कई अध्ययन बताते हैं कि नियंत्रित उपवास रक्तचाप, शुगर और पाचन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
एकादशी पर लोग अक्सर फलाहार या सादे भोजन का सेवन करते हैं, जिससे शरीर हल्का रहता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा की ऊर्जा शरीर पर विशेष प्रभाव डालती है, और उपवास इस ऊर्जा को नियंत्रित ढंग से ग्रहण करने में सहायक होता है।
आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक—तीनों स्तरों पर लाभ देने के कारण यह व्रत आज भी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है।
